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घोडा ब्रांड क्रिकेटर व्यंग्य संग्रह न्यूज चैनल पर

World book fair 2023

A coverage of of my Book "घोडा ब्रांड क्रिकेटर"  by News Channels 

News 24

Aaj Tak

Cricket & Critic 

With Famous Writers and my Friends

इंसान के हौसले की कहानी

यह जिंदगी एक पल सही , 

एक दिन सही जितनीं है , 

उतनी ही सही, है तो । 

यह मौत की तरह कम से कम किसी सीक्रेट मिशन की 

यात्रा तो नहीं है  

जो अपना पता तक नहीं देती । 

और इसीलिए

हर इंसान 

तमाम मुश्किलों और अड़चनों के बाद भी 

सदियों से , 

हर बार टूट कर बिखर जाने के बाद भी, 

तुझे जीने का हौसला रखता है । 

उसे पता है 

ज्वार भाटे से उठी लहरों के थमने के बाद 

पहाड़ों पर चट्टानों के फिसलने के बाद ,

ज्वालामुखी के लावे के बहने के बाद 

हर तूफान को एक दिन थम जाना है । 

और जिस दिन 

तूफान थमेगा 

यह जो रुक हुआ वक्त है 

अपने भीतर 

ढेर सारे गुजरे हादसों की कहानी समेन्टे 

उठ खड़ा होगा । 

क्योंकि वक्त का हौसला

 महाभारत , कलिंग 

और पुरू व सिकंदर के युद्ध भी नहीं तोड़ पाए ।

 हां हम लोगों के बीच से ही , 

वे लोग , जो  आगे जाएंगे , 

नए वक्त को ,

 इंसान के हौसले की , कहानी  सुनाएँगे । 


"अधूरी बात" क्या पता इस पुस्तक की अधूरी बात ही पूरी हो

वह जो मुझे लगा

 भले ही ईमानदारी अजायब घर में

रखी हुई कोई चिड़िया हो,

न जाने क्यों मुझे अहसास होंने लगा है,

ढेर सारी जीत , 

जो इस चिड़िया के बिना हासिल होती हैं

वह अधूरी हैं।

और जो हार इस चिड़िया को 

अपने भीतर रख कर मिलती है

वह कींमती 

सुधर तो जाता मगर

 

यहां

ऊपर से ले कर नींचे तक

हर कोई मुझे सुधारना चाहता है,

सिर्फ इसलिए 

क्योंकि  ,

मैं उसकी तरह नहीं,

अपनी तरह 

जिंदगी जी रहा हूँ।

बात सिर्फ इतनी है कि

उसे अपना रास्ता सही और मेरा रास्ता गलत दिखता है,

और फिर अचानक

उसे मेरा रास्ता सही दिखने लगता है लेकिन,

वह अपने रास्ते को गलत कैसे स्वीकार करे,

क्योंकि तब उसे

अपने पूरे जीवन की सार्थकता समाप्त होती दिखाई देगी और बस यहीं

अहंकार जन्म लेता है,

अपने "गलत" खुद को ,

अपने ही भीतर ,

सही सिद्ध करने के लिए।

अब इस अहंकार को पूर्ण करने में ,

भले ही ढेर सारे

 निर्दोष मार दिए जाएं।

क्योंकि 

एक बार अपनी  निगाह में ,

"निर्दोष" व्यक्ति सही साबित हो गए तो ,

अपने भीतर ,

स्वयं के   दोषी होंने के विचार को  स्वीकृति प्रदान करनी होगी ,

और तब 

"आत्मग्लानि" से 

बचने का मार्ग नहीं होगा। 

जीत गए तुम - यह किताब हार कर जीतने का हुनर बताती है

ज़िदगी जीने का ख्वाब

मेरे भीतर 

अपने होंने 

और सांस लेने की 

उम्मीद जगा दो ,

मैं एक बार फिर 

जिंदगी जीने का 

"ख़्वाब " 

देखने निकला हूँ ।  


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